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मनमोहक प्रस्तुतियों ने बांधा समा

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का वार्षिक सांस्कृतिक एवं खेलकूद आयोजन 'प्रतिभा-2016’

नोएडा, 16 मार्च,  2016 : माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय नोएडा परिसर के वार्षिक सांस्कृतिक एवं खेलकूद आयोजन ‘प्रतिभा-2016’ के पांचवें दिन के प्रतिभागियों ने मनमोहक प्रस्तुतियों से समा बाँधा। कार्यक्रम में एकल गायन, नाटक व नुक्कड़ नाटक, मिमीक्री, एकल नृत्य और एकल अभिनय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसमें प्रतिभागियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।

एकल गायन प्रतियोगिता का विषय शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय संगीत रखा गया। प्रतिभागियों ने अपने गायन से श्रोताओं के साथ-साथ निर्णायकों का भी मन मोहा। इस प्रतियोगिता में विभिन्न पाठयक्रमों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। मंच संचालक की भूमिका मुकेश झा और रोहित शर्मा ने निभाई।

कार्यक्रम की दूसरी प्रतियोगिता के रूप मे नाटक व नुकड़ नाटक की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें तीन नाटकों का मंचन किया गया। कफील अहमद फारुकी द्वारा रचित और रवि राज द्वारा निर्देशित नाटक “अनोखी रामलीला” का मंचन पहले नाटक के रूप मे किया गया जिसके सूत्रधार आशुतोष झा थे। दूसरे नाटक के रूप मे संकल्प श्रीवास्तव, मोनिका केशरी और शावली गुप्ता द्वारा और संकल्प श्रीवास्तव के द्वारा निर्देशित रचित नाटक “जनजागरण” का मंचन किया गया। इस नाटक के सूत्रधार नाटक के लेखकों मे से एक संकल्प श्रीवास्तव थे। प्रतियोगिता मे अंतिम मंचन अतुल गुप्ता द्वारा लिखित एवं अभिषेक ओझा और अतुल गुप्ता द्वारा निर्देशित नुकड़ नाटक रहा जिसमे गाँव की बदहाली के कारण और उनके उपचार के बारे मे दर्शाया गया। मंच का संचालन ममता सिंह और प्रभाकर झा ने किया।

मिमीक्री प्रतियोगिता दिन का तीसरा आयोजन आयोजन रहा। जिसमे भाग लेने वाले प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा के साथ-साथ अपनी अवलोकन क्षमता का भी परिचय दिया। फिल्मी सितारों के अलावा अपने अध्यापकों और अपने मित्रों की नकल करके बखूबी ढंग से दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत किया।

आयोजित प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव, जानेमाने फ़िल्मकार, अदाकार व पत्रकार अतुल गंगवार के साथ ही विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र और पत्रकार कार्यक्रम के निर्णायक वरिष्ठ पत्रकार कमलेश त्रिपाठी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा मैं यहाँ भविष्य के कुछ बेहतरीन पत्रकारों को देख रहा हूँ, लेकिन विद्यार्थियों को और अधिक अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभवों को विद्यार्थियों से साझा करते हुए कहा कि किसी विषय के बारे में न जानना कमजोरी या अपराध नहीं है लेकिन जानने की कोशिश न करना अपराध की श्रेणी में जरुर आता है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से हट कर भी किताबें पढ़ने कि आदत डालनी चाहिए।