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पत्रकार संन्यासी से भी बढ़कर है : स्वामी शाश्वतानंद गिरि

 

नोएडा, 25 अप्रैल, 2016 : ‘‘पत्रकार संन्यासी से भी बढ़कर है। जनआकांक्षाओं का भार आज पत्रकारों के कंधे पर है। पत्रकारिता के लिए यह बड़ी चुनौती है। ये बातें गीता फ़ाउंडेशन कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष स्वामी शाश्वतानन्द गिरि ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, निस्कोर्ट एवं इयान स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सेमिनार में कही। सेमिनार का विषय ‘सत्य और मीडिया’ था। दो दिनों तक चलने वाले इस सेमिनार में स्वामी शाश्वतानंद गिरि ने पत्राकारों की भूमिका पर चिंता जताते हुए कहा कि हिंदू धर्म गुरू आज पत्राकारों के लिए सबसे सुपाच्य भोजन हो गए हैं।’

            माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति बी.के. कुठियाला ने कहा कि आज के पत्रकार जल्दी से जल्दी समाचार प्रसारित-प्रकाशित करने की होड़ में सत्यता की परख नहीं करते। जो कि चिंताजनक है। उन्होंने आगे कहा कि सत्य को खोजना और उसे स्थापित करना पत्रकारिता का धर्म है। सत्य से ही समाज में शांति, प्रेम और भाईचारा स्थापित हो सकता है।  मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रो. एन.एन. पिल्लई ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने सोच और समझ के आधार पर सत्य बोलता है। अर्थात सत्य व्यक्ति सापेक्ष होता है। महत्त्व इस बात का है कि सत्य सार्वभौमिक हो। गैलेलियो का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सत्य बोलने के साथ-साथ उस पर अटल रहना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि सत्य बोलने की सजा गैलेलियो को भुगतनी पड़ी फिर भी वे सत्य पर अडिग रहे। गौरतलब है कि गैलीलियो ने पहली बार यह कहा था कि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है जबकि अनादिकाल से वहां यह मान्यता थी कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता है।

            द्वितीय सत्रा में अपने विचार व्यक्त करते हुए प्रसिद्ध पत्राकार अंशुमन तिवारी ने कहा कि पत्रकारिता में सच का संधान कठिन नहीं वरन् जटिल हो गया है। बदलती परिस्थितियों में सत्य को खोजने का तरीका भी बदल गया है। जब सत्य को छिपाने के एक से बढ़कर एक तरीके अपनाए जा रहे हों तब पत्रकार सत्य को खोजने के लिए अवश्य हीं नया तरीका अपनाना चाहिए, इसमें किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इंटरनेट के आविष्कार के साथ पत्राकारिता का पूरा स्वरूप बदल गया है। आज हम सच बोलने की प्रतिस्पर्धा में हैं। पत्रकारिता के समक्ष सच को उजागर करने की चुनौती सबसे बड़ी है। सच को तलाशने में आज के पत्राकारों को अधिक आक्रामक होना होगा। सच को उजागर करने के धंधे में आप अकेले नहीं हैं। अनेक मीडिया संस्थान जोखिम उठाकर सच को उजागर कर रहे हैं।

            माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने अपने वक्तव्य में कहा कि सकारात्मक समाचार को श्रोता पसंद नहीं करते इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारण है। वस्तुतः हमारे नकारात्मक भाव को मीडिया भुना रहा है। हम अतिसूचनात्मकता की होड़ में हैं, जो इस युग का सबसे बड़ा अभिशाप है।

            सभा को संबोधित करने वालों में संस्कृत विद्वान व राष्ट्रीय सांप्रदायिक सद्भाव पुरस्कार विजेता मोहम्मद हनीफ शास्त्री, डॉ. अविनाश वाजपेयी, फादर इ. करवालो, फादर जोश मोरीकन, फादर सुदीप पौल, फादर मारिया सुसाई, श्री अनुज गर्ग, श्रीमती रजनी नागपाल आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। इस अवसर पर मीडिया से जुड़ी अनेक हस्तियां एवं प्राध्यापकों के साथ भारी संख्या में जनसंचार के विद्यार्थी उपस्थित थे।