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खेती को प्रोत्साहित करने की बने नीति

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में 'कृषि एवं मीडिया' विषय पर कृषि मामलों के विशेषज्ञ देविंदर शर्मा का व्याख्यान

भोपाल, 22 नवम्बर, 2017: वर्तमान स्थिति ऐसी है कि किसान खेती छोडऩे को मजबूर है। दुनिया में इकनॉमिक डिजाइन ही कुछ इस तरह का है कि उसमें खेती को समृद्ध करने की गुंजाइश नहीं है। गाँवों से लोगों को लाकर शहरों में बसाने को वैश्विक संस्थाएं विकास मानती हैं। किंतु, आज शहरों में उनके लिए रोजगार नहीं है। ऐसी स्थिति में हम गाँव को सम्पन्न करने की नीति क्यों नहीं बनाते हैं? सरकार को खेती को प्रोत्साहित और समृद्ध करने की नीति बनानी चाहिए। इससे कृषि के क्षेत्र में बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। यह विचार कृषि मामलों के विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में 'कृषि एवं मीडिया' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए।

            उन्होंने कहा कि देश का 52 प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। किंतु, मीडिया में समाज के सबसे बड़े हिस्से की अनदेखी की जाती है। यह स्थिति आज नहीं है, पहले भी ऐसा ही था। देश में महँगाई न बढ़े, देश की जनता को अनाज सस्ता उपलब्ध हो सके, इसका पूरा दबाव किसानों पर है। सन् 1970 से अब तक गेंहू के दाम में केवल 20 गुना बढ़ोतरी हुई है, उसकी तुलना में अन्य नौकरीपेशा लोगों के वेतन में 120 से लेकर 320 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। देश में किसान की औसत आय 20 हजार रुपये वार्षिक है। इतनी आय में एक किसान पाँच सदस्यों के अपने परिवार का भरण-पोषण किस प्रकार कर सकता है? उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार प्रत्येक 41 मिनट में एक किसान आत्महत्या करता है। इस स्थिति में बदलाव आना चाहिए। इसके लिए पत्रकारों को इकनॉमिक डिजाइन को समझना जरूरी है।

            श्री देविंदर शर्मा ने कहा कि गरीबों को मिलने वाली सबसिडी एवं लोन माफी को नकारात्मक ढंग से देखा जाता है। जब किसानों का लोन माफ किया जाता है, तब देश की अर्थव्यस्था को नुकसान पहुँचता है, ऐसा प्रचारित किया जाता है। वहीं, जब कॉरपोरेट का लोन माफ किया जाता है, तब इकनॉमी में बढ़ोतरी बताई जाती है। यह किस प्रकार की अवधारणा है। वर्तमान समय में जिस प्रकार की स्थितियां हैं, उनमें कृषि को सहायता देने की आवश्यकता है। कॉरपोरेट की तरह यदि कृषि को सहयोग किया जाए, तो देश की तस्वीर बदल जाएगी। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने कहा कि खेती पर दबाव बहुत अधिक है। उसका यह दबाव कम करने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामोद्योग को विकसित करके इस दिशा में कुछ समाधान हो सकता है। आभार व्यक्त कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने किया और कार्यक्रम का संचालन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग के लोकेन्द्र सिंह ने किया।