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अपने पैदा किए सूरज से उजाला मांगो - राजीव वर्मा

मनोरंजन का संसार युवा भारत के हाथों में राजीव वर्मा

भारत वाचिक परंपरा का देश, मनोरंजन का रस हमारी रग-रग में

पत्रकारिता विश्वविद्यालय में संगोष्ठी का पहला दिन सम्पन्न

मनोरंजन, कम्यूटर और प्रबंधन से जुड़े विषयों पर आज होगा व्याख्यान 

भोपाल, 23 नवंबर, 2017: भारत का मनोरंजन उद्योग वैश्विक स्‍तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराया है। मनोरंजन के क्षेत्र में युवाओं के लिए असीम संभावनाएं है। इस उद्योग के किसी भी तरह के प्रोडक्‍शन का कार्य प्रबंधन के बिना संपन्न नहीं किया जा सकता। भारत में वर्तमान दौर मनोरंजन के लिए स्वर्णकाल कहा जा सकता है। यह विचार आज माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में मीडिया प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में  फिल्म अभिनेता एवं वरिष्ठ रंगकर्मी राजीव वर्मा ने व्यक्त किए।

        संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में उन्होंने कहा कि मनोरंजन का संसार युवा भारत के हाथों में है, लेकिन यह कला का संसार राजनीति से प्रभावित होती दिख रही है जो इसके भविष्य के लिए ठीक नहीं है। संगोष्ठी में मनोरंजन उद्योग में संभावनाओं और चुनौतियां विषय उन्होंने कहा कि सिनेमा और रंगमंच को एक ऐसी विधा माना गया है जिसमें बहुत सारे पक्ष साथ-साथ चलते हैं जिससे सभी का अपना महत्व होता है। यह प्रबंधकीय कौशल विकास की विधा है, जिसमें टेक्निकल स्किल्स को जानना-समझना बहुत जरूरी है। आज प्रबंधकीय कौशल वाले युवाओं की मनोरंजन उद्योग में सबसे ज्यादा मांग है। 

        कार्यक्रम की विशिष्ठ अतिथि विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव लाजपत आहूजा ने कहा कि मनोरंजन का संसार युवा भारत के हाथों में है। यहां मनोरंजन के लिए विभिन्नर तरीकों का प्रदर्शन पुरातन काल से चला आ रहा है। इसे व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए मनोरंजन उद्योग में अनेकों संभावनाएं है। इन संभावनाओं को देखते हुए ही विश्वविद्यालय का मीडिया प्रबंधन विभाग मनोरंजन संचार शास्त्र कोर्स संचालित करता है।

मीडिया प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी की  अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि भारत कहानियों का देश है। वर्तमान समय मनोरंजन उद्योग का स्वर्णकाल है। भारत की परंपरा मनोरंजन की परंपरा रही है। वैदिक काल से ही मनोरंजन हमारे मुख्य उद्देश्यों में प्रमुखता से शामिल है। उन्हों ने कहा कि हमारा समाज वाचिक परंपरा का है। वाचिक परंपरा में व्यतकित को अपनी बात कहने की कला आनी चाहिए। हमें बोलने की कला आनी चाहिए। प्रस्तुति के आधार पर ही एक तरह की कहानी महान बन जाती है दूसरी साधारण। उन्होंने कहा कि कंटेंट को प्रजेंट करने का तरीका अगर सुचारू होगा तो सब कार्य आसानी से हो जाते है। इस सत्र का संचालन मीडिया प्रबंधन विभाग के विद्यार्थी गौरव मौर्य ने किया । समापन वक्‍तव्‍य मीडिया प्रबंधन विभाग के अध्ययक्ष प्रो. अविनाश वाजपेयी ने दिया।

संगोष्ठी के पहले दिन पहले सत्र के मुख्य वक्ता डीबी डिजिटल के संपादक श्री अनुज खरे ने कहा कि डिजिटल मीडिया का दायरा दिनोंदिन बढता जा रहा है। डिजिटल मीडिया में रोजगार की असीम संभावनांए है। आज डिजिटल कन्वर्जेंस  का समय है। डिजिटल उद्योग के इस दौर में मल्‍टी टैलेंटेड व्याक्तियों की मांग है। श्री खरे ने डिजिटल मीडिया पर बोलते हुए कहा कि नए आईडिया की डिमांड सबसे ज्यादा है। अगर आप कुछ नया करने का प्रयास करेंगे तो डिजिटल मीडिया का बाजार आपका इंजतार कर रहा है। श्री खरे ने विद्यार्थियों को बताया कि कंटेंट में नया लाने के लिए संदर्भ और साहित्य का अध्ययन जरूरी है। उनहोंने कहा कि पाठकों के लिए कुछ नया या नई कहानियाँ हमें समाज से, आम जिंदगी से एवं किताबों से मिलती है। आज अच्छी कहानियों का अभाव इसलिए है क्योंकि हम अपने साहित्य की ओर देख नहीं रहे हैं। इस सत्र का संचालन मीडिया प्रबंधन विभाग के विद्यार्थी मुस्कान सोनी ने किया । समापन व्‍क्‍तव्‍य  नवीन मीडिया प्रौद्योगिकी  विभाग की अध्‍यक्षया प्रो. पी. शशिकला ने दिया। इस सत्र का मौडरेटर सहायक प्राध्यापक डॉ. कपिल चंदोरिया थे।

पहले दिन के दूसरे सत्र में मुख्य वक्ता  के रूप में  विजन एडवाईजरी के सी.इ.ओ श्री प्रदीप करमबेलकर  ने विद्यार्थियों को स्टार्टअप से सम्बंधित कई पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि कुछ नया करने के लिए नया विजन होना जरूरी है। श्री करमबेलकर ने कहा कि जिसमें भी जोखिम लेने का साहस होगा वह स्टार्टअप में अपनी मुकाम पा सकता है। इसके लिए शासकीय और गैर-शासकीय  स्तरों पर प्रसास किया जा रहा है। साहस के साथ जोखिम लेने वाला व्यक्ति इसका फायदा ले सकता है। उन्होंने कहा कि अगर आपके पास दूसरों से अलग विचार है तो उस पर काम करने के साथ एक  फ्रेम में लाने की आवश्यकता है। इस सत्र का संचालन मीडिया प्रबंधन विभाग के विद्यार्थी स्तुति शर्मा ने किया । समापन वक्‍तव्‍य   पुस्त्कालय विभाग की अध्यक्षया डॉ.आरती सारंग ने दिया। इस सत्र का मौडरेटर मीडिया प्रबंधन विभाग के शिक्षक श्री अमरेन्द्र  कुमार आर्य  थे। संगोष्ठी के पहले दिन के तीसरे सत्र में विद्यार्थियों ने विभिन्न थिमों पर प्रेजेंटेशन दिया।

विभिन्न विषयों पर होगा आज व्याख्यान

संगोष्ठी  के दूसरे दिन चतुर्थ सत्र में रमानी ग्रुप ऑफ कंपनीज् के एचआर हेड निर्मल सिंह राघव सफल उद्ययम के लिए विपणण नीति विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। पांचवा सत्र विज्ञापन एवं विपणण में तकनीक का उपयोग करने के तरीकों पर आधारिता होगा, जिसमें मध्यप्रदेश सरकार के तकनीकी सलाहकार श्री रजत पाण्डे य अपने विचार व्यतक्तआ करेंगे। छठे सत्र में फिल्म प्रमोशन और प्रचार  की नीति पर  सिनेमा पटकथा लेखक एवं निर्देशक श्री विनीत जोशी विद्यार्थियों को संबोधित करेंगे। सातवे सत्र में अनिमेष फिल्म  प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ अविनाश त्रिपाठी सिनेमॉटोग्राफी में प्रबंधन से संबंधित विषय पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। इस दो दिवसीय संगोष्ठी के समापन सत्र में मीडिया प्लानिंग की नीति विषय पर विश्वेविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला अपने विचार व्यक्त रखेंगे और समापन सत्र में मुख्यि अतिथि के रूप में भारत संचार निगम लिमिटेड, भोपाल के महाप्रबंधक श्री महेश शुक्ला उपस्थित रहेंगे। संगोष्ठी के अंत में मीडिया प्रबंधन विभाग के विद्यार्थी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति देंगे।