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मूक-बधिर दिव्यांगों के संवाद को मजबूत बनाने का हों प्रयास

सांकेतिक भाषा को उन्नत एवं प्रभावशाली बनाने की आवश्यकता

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शरणजीत कौर की पुस्तक का विमोचन

भोपाल, 30 दिसम्‍बर, 2017: मूक-बधिर बच्चे सांकेतिक भाषा से अपनी बात कहते हैं। या तो उनकी तरह दिव्यांग ही उनकी बात को समझ पाते हैं या फिर उनकी सांकेतिक भाषा जानने वाला व्यक्ति ही उन्हें समझ सकता है। आज तकनीक का युग है। संचार प्रौद्योगिकी से जुड़े विशेषज्ञों को ऐसे प्रयास करना चाहिए कि इस प्रकार के दिव्यांग सबके साथ सहजता से संवाद कर सकें। मूक-बधिर और सामान्य लोगों के बीच के संवाद को मजबूत बनाने का प्रयास होना चाहिए। यह विचार मूक-बधिर बच्चों के बीच में काम करने वाली सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. शरणजीत कौर ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में व्यक्त किए। डॉ. कौर ने मूक-बधिर दिव्यांग बच्चों के संबंध में शोधपूर्ण पुस्तक 'सोशल वर्क इंटरवेंशन विथ स्पीच एण्ड हीयरिंग इम्पेर्ड' का लेखन किया है। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला एवं अन्य अतिथियों ने डॉ. कौर की इसी पुस्तक का विमोचन किया।

            इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. कौर ने दिव्यांग बच्चों के साथ किए कार्य का अनुभव सुनाया। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चों के संबंध में बनने वाली योजनाओं का विचार एवं क्रियान्वयन सामान्य लोग करते हैं, जो उनको समझते भी नहीं है। आज आवश्यकता है कि उनके लिए बनाई जाने वाली योजनाओं में उन्हें शामिल किया जाए और उनके सुझाव लिए जाएं। उन्होंने कहा कि दिव्यांग बच्चे भी बहुत प्रतिभावान होते हैं। वह पढऩा-लिखना और आगे बढऩा चाहते हैं। किंतु, उनके लिए शिक्षा के उतने अवसर उपलब्ध नहीं है। इस दिशा में सरकारों को विचार करना चाहिए।

            कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के प्रति हमारा मर्न अधिक संवेदनशील होना चाहिए। जो बच्चा बोल-सुन नहीं सकता, यह हमारे लिए बड़ी चुनौती है। सांकेतिक भाषा ने संवाद की दिशा में एक समाधान दिया है। किंतु, आज जिस प्रकार तकनीक का विकास हुआ है, उसका उपयोग कर हमें सांकेतिक भाषा को और अधिक उन्नत एवं प्रभावशाली बनाने की आवश्यकता है। ताकि दिव्यांग और सामान्य बच्चे आपस में सहजता से संवाद कर सकें। कार्यक्रम का संचालन श्री दीपक चौकसे ने किया। इस अवसर पर सीईसी के निदेशक प्रो. राजवीर सिंह, सीएसआईआर के निदेशक प्रो. मनोज कुमार पटैरिया, एमिटी यूनिवर्सिटी गुडगाँव की प्रो. पूजा राणा, कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा, सम्बद्ध अध्ययन संस्थाओं के निदेशक श्री दीपक शर्मा एवं कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी सहित शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।