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प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेना व्यक्तिव विकास में सहायक: श्री क्रांति

एमसीयू  के विभिन्न परिसरों में हुए प्रतिभा-2017 का पुरस्कार वितरण समारोह संपन्न

भोपाल, 14 मई 2017: सफलता सिर्फ दिमाग से तय नहीं होती, उसमें शरीर के अन्य अंग भी कार्य करते है| खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी से हमारा विकास होता है| वास्तव में प्रतिस्पर्धाऐ हमारे व्यक्तित्व विकास में प्रमुख भूमिका निभाती है। उन विद्यार्थियों के जीवन में सफलता की दर ज्यादा होती है जो पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी भाग लेते है। ये बातें वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय क्रांति ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में विभिन्न परिसरों के विद्यार्थियों के वार्षिक खेलकूद एवं सांस्कृतिक आयोजन प्रतिभा-2017 के पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कहा।

वरिष्ठ पत्रकार श्री विजय क्रांति ने कहा कि पूर्व की तुलना में पत्रकारिता एवं संचार के अच्छे और ज्यादा प्रशिक्षण संस्थान उपलब्ध हैं। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी ज्यादा है। लेकिन ज्यादातर विद्यार्थियों का सिर्फ टेलीविजन की तरफ रूझान होने से प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। ऐसा लगता है कि वे सब 'पिंकी पप्पू सिंड्रोम से पीड़ित है। उन्होंने कहा कि युवाओं को मीडिया के अन्य माध्यमों में भी रोजगार के अवसर भी देखना चाहिए और वहां सीखना चाहिए। टेलीविज़न सीखने की जगह नहीं है, यह परफार्म करने की जगह है। प्रिंट मीडिया में प्रशिक्षित पत्रकार टेलीविज़न में ज्यादा तेजी से सफलता प्राप्त करता है।

नारद की तरह बने संचारक

समारोह की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृज किशोर कुठियाला ने विद्यार्थियों से आव्हान किया कि वे नारद की तरह सफल और विश्वनीय संचारक बने। देवर्षि श्री नारद की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वे पूरे विश्व की सूचनाएं रखते थे। उनकी सूचनाओं पर कभी भी प्रश्नचिन्ह नहीं लगा, क्योंकि उनकी विश्वनीयता ऐसी बन चुकी थी। वे हमेशा समाज हित में सुझाव देते थे। उन्होंने कहा कि भारत विश्वगुरू बन चुका है। आज 27 ऐसे देश हैं, जिनमें से यदि भारतीयों को वापस बुला लिया जाए तो उनकी कोई ना कोई व्यवस्था ठप्प हो जायेगी। अब हमें यह सुनिश्चित करना है कि विश्व को हम कहाँ ले जाना चाहते हैं। वर्तमान समय आज के युवाओं के लिए स्वर्णिम काल है। पूरा विश्व संवादपालिका पर आधारित हो रहा है। सोशल मीडिया ने देशों की सीमाओं को अप्रासंगिक बना दिया है! संवाद के माध्यम उन्नत हो रहे है और मीडिया विश्व मानवता का निर्माण कर रहा है। संचार की विविध व्यवस्थाओं को चलाने के लिए करोड़ों लोगों की आवश्यकता है। युवाओं के लिए नए अवसर सामने आने वाले है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे ऐसा व्यक्तिव बनाये जो समाज में स्वीकृत हो और सम्मानित भी हो। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा, कुलसचिव श्री दीपक शर्मा भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में नोएडा परिसर से 65, खंडवा से 22, ग्वालियर से 18 और रीवा परिसर से 9 विद्यार्थियों ने भागीदारी की। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अध्यापक भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. राखी तिवारी ने किया। आभार प्रदर्शन कार्यक्रम की संयोजक डा. आरती सारंग ने किया।