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‘भय मुक्त, सुरक्षित भारत बनाएँ’

दुनियाभर में भारत की छवि बदली

नोबेल  पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी ने किया युवाओं से आव्हान

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय का सत्रारंभ समारोह प्रारम्‍भ

भोपाल 27 जुलाई, 2017: शांतिदूत के रूप में पहचाने जाने वाले, नोबेल पुरस्कार से सम्‍मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने युवाओं से आव्हान किया कि वह भय मुक्त और सुरक्षित भारत के निर्माण के लिए आगे आएं। युवा समस्या नहीं, समाधान है। हमारी आज़ादी जब तक मुकम्मल नहीं है जब तक की हम बहन एवं बेटियों को सुरक्षित नहीं कर लेते। वेदों ने भी कहा है कि समाज के बेहतरी का विचार रखने वाले लोगो को एक साथ आना चाहिए। विश्वभर में भारत की छवि बदली है। अब हमे आशा भरी नज़रों से देखा जाने लगा है।

यह विचार श्री सत्यार्थी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के सत्रारंभ समारोह में व्‍यक्‍त किये। वे शुभारम्‍भ सत्र के मुख्‍य अतिथि थे। उन्‍होंने कहा कि हमारे मन में अन्‍याय, अत्‍याचार और गलत चीजों के खिलाफ गुस्‍सा होना चाहिए, क्‍योंकि वह एक ता‍कत है और परिवर्तनकारक होगा। दुनियाभर में नौजवानों, महिलाओं और बच्‍चों का हिंसा में उपयोग किये जाने को लेकर उन्‍होंने चिंता जताई और सवाल किया कि भारत जैसे देश में बच्‍चे कब सुरक्षित होंगे। हर घंटे, दो बच्‍चे यौन शोषण का शिकार हो रहे हैं।

उन्‍होंने युवाओं से आव्हान किया कि वे परिवर्तन के लिए आगे आएं। जो लोग बाहर से सिर्फ आलोचना करते हैं वे इतिहास नहीं लिखते। इतिहास वो बनाते हैं जो हार या जीत की परवाह करे बगैर मैदान में उतर जाते हैं। दुनियाभर में बच्‍चों के शोषण को लेकर उन्‍होंने कहा कि यह तर्क पूर्णत: असत्‍य है कि गरीबी के कारण बच्‍चे पुस्‍तकों-स्‍कूलों से दूर हैं। यदि विश्‍वभर का एक सप्‍ताह के सेना का खर्च कम कर दिया जाए तो या फिर यूरोप में लिपिस्टिक-पाउडर पर खर्च होने वाला छठवां हिस्‍सा बचा लिया जाए या अमेरिका में तंबाखू पर होने वाले खर्च का पांचवा हिस्‍सा बचा लिया जाए तो दुनियाभर के सारे बच्‍चों को स्‍कूल में पढ़ाया जा सकता है। सभी बच्‍चों को प्राथमिक स्‍कूल भेजने पर मात्र 22 बिलियन डॉलर ही खर्च हो रहे हैं, जबकि सेना पर दो ट्रिलियन डॉलर प्रतिवर्ष खर्च होते हैं।

आम आदमी की ताकत से बदला संविधान

समारोह में श्री सत्‍यार्थी ने भारत में शिक्षा के अधिकार के कानून को लेकर किये गये उनके प्रयास का उल्‍लेख किया। उन्‍होंने कहा कि बालश्रम से मुक्‍त हुये बच्‍चों को स्‍कूल में दाखिला दिलाने के दौरान उन्‍हें अनुभव हुआ कि बच्‍चों की शिक्षा को लेकर कानून बनना चाहिए। लेकिन इसके लिए संविधान में संशोधन आवश्‍यक होगा। इस बारे में उन्‍होंने तत्‍कालीन प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी वाजपेयी से भी चर्चा की। इसके बाद उन्‍होंने कन्‍याकुमारी से यात्रा निकाली और इस यात्रा में 163 सांसद अलग-अलग स्‍थानों पर शामिल हुए। दिल्‍ली में यात्रा की समाप्ति पर प्रधानमंत्री, राष्‍ट्रपति बच्‍चों से भी मिले। यह एक आम आदमी की ताकत है कि चार महीने में भारत का संविधान बदला और शिक्षा का अधिकार कानून बना। आज इससे करोड़ों बच्‍चे लाभान्वित हो रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि हमारा देश लगातार आगे बढ़ रहा है। दुनियाभर में भारत की छवि बदली है। कई ऐसे देश हैं जो आज भारतीयों से प्रतिस्‍पर्धा के कारण चिढ़ते हैं और कुछ वीजा बंद करने की मांग कर रहे है, ऐसे भी देश हैं जहां भारतीय उनकी दौलत की बुनियाद बन चुके हैं।

नोबेल पुरस्‍कार के बाद चालीस हजार आमंत्रण मिले

विश्‍वभर में बालश्रम के विरुद्ध आंदोलन के नेतृत्वकर्ता श्री सत्‍यार्थी ने कहा कि वर्ष 2014 नोबेल पुरस्‍कार मिलने के बाद उन्‍हें विश्‍वभर से कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण प्राप्‍त हुए। उन्‍हें लगभग अभी तक 40 हजार आमंत्रण प्राप्‍त हुए। उनकी टीम ने इसका अध्‍ययन किया और पाया कि यदि वे इन सब कार्यक्रमों में भाग लेंगे तो उन्‍हें 175 वर्ष लगेंगे। 

शिक्षा खुद को जानने की शुरुआत

श्री सत्‍यार्थी ने एक कहानी के माध्‍यम से विद्यार्थियों को बताया कि शिक्षा खुद को जानने की शुरुआत है, सही मायने में सीखने के लिए हमें अहंकार को छोड़ना होगा। उन्‍होंने मीडिया के विद्यार्थियों को कहा कि जिस पाठ्यक्रम को उन्‍होंने चुना है वह इस प्रकार का यज्ञ है जिसमें गुणात्‍मकता होगी। कलम की ताकत बहुत बड़ी होती है और लिखे और पढ़े गये शब्‍द कभी समाप्‍त नहीं होते। वे एक ईको सिस्‍टम का निर्माण करते हैं। हमारे यहां शब्‍द को आकाश भी कहा गया है। वर्तमान में टेलीविजन के टीआरपी ट्रैण्‍ड को लेकर उन्‍होंने कहा न्‍यूज चैनल में टीआरपी सैक्‍स स्‍कैण्‍डल, पॉलिटिकल स्‍कैण्‍डल और व्‍यक्तियों के आसपास ही है। टीवी मीडिया वंचित वर्ग और महिलाओं, बच्‍चों को कवर नहीं करता। जो विज्ञापन दिला सके वही कंटेंट टीवी पर नजर आता है। इस कारण समाज का एक बड़ा हिस्‍सा हमेशा पीछे छूट जाता है। उन्‍होंने कहा कि मीडिया को मुद्दों के फॉलोअप पर भी काम करना चाहिए। क्‍योंकि इसमें चेहरों के पीछे जिंदगियां होती है और काला-सफेद सत्‍य होता है।

बच्‍चों के चेहरों पर ईश्‍वर को देखा

श्री सत्‍यार्थी ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्‍होंने बताया कि किस तरह ‘संघर्ष जारी रहेगा’ पत्रिका शुरू करने के बाद पंजाब की एक घटना ने उनका जीवन बदल दिया। बंधुआ मजदूरों को पंजाब के गांव से छुड़ाने के दौरान उनकी पिटाई भी हुई। वे एक मजदूर के अनुरोध पर उसकी बेटी साबो को उन लोगों से छुड़ाने के लिए गये थे, जिसको मजदूर के मालिकों ने वेश्यावृत्ति के लिए बेच दिया था। इस मामले में उन्‍होंने दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय में बंदी प्रत्‍यक्षीकरण याचिका भी लगाई। बाद में 36 लोग न्‍यायालय के आदेश से मुक्‍त किये गये। दिल्‍ली में जब वे आये तो उन्‍होंने आजाद हुए बच्‍चों के चेहरों पर ईश्‍वर को देखा।

कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बृज किशोर कुठियाला ने कहा कि विद्यार्थियों को संकल्‍प लेना चाहिए कि वे केरियर के अलावा अपने देश और समाज के लिए क्‍या योगदान कर सकते हैं। नवागत विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उन्‍होंने कहा कि सत्रारंभ कार्यक्रम में समाज के प्रमुख व्‍यक्तियों को इसलिए आमंत्रित किया जाता है ताकि विद्यार्थी अपने केरियर के अतिरिक्‍त कुछ और ज्ञान भी प्राप्‍त कर सके, जो, उन्‍हें अपने जीवन में काम आए। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम के संयोजक एवं जनसंचार विभाग के अध्‍यक्ष श्री संजय द्विवेदी ने किया।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. कुठियाला ने श्री सत्‍यार्थी का शॉल-श्रीफल भेंटकर सम्‍मान भी किया। मंच पर पूर्व राष्‍ट्रपति ए.पी.जे. अब्‍दुल कलाम को श्रद्धा-सुमन भी अर्पित किए गए। प्रारम्‍भ में विद्यार्थियों ने सरस्‍वती वंदना प्रस्‍तुत की। कार्यक्रम में ‘अतुल्‍य भारतम’ और ‘मीडिया नवचिंतन’ पत्रिका के नये अंक का विमोचन भी किया गया।

पत्रकारिता के लिए संवेदनशील बने- श्री अंसारी

माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में सत्रारंभ कार्यक्रम में शुभारम्‍भ के बाद तीन सत्र भी आयोजित हुए। ‘टीवी न्यूज़ का भविष्य’ विषय पर हुए सत्र को संबोधित करते हुए आज तक के न्यूज़ एंकर  श्री सईद अंसारी ने कहा कि पत्रकारिता में संवेदनशील होना बहुत आवश्यक है। दूसरों के दर्द, तकलीफ को महसूस करने वाला व्यक्ति ही सफल और अच्छा पत्रकार होता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सिर्फ पेशा नहीं होना चाहिए,बल्कि मिशन होना चाहिए क्योंकि मिशन है तो ही मीडिया इंडस्ट्री में लम्बे समय तक टिका जा सकता है। पत्रकारिता के विद्यार्थियों को लेकर उन्होंने कहा की टीवी न्यूज़ में भविष्य उज्जवल है।आने वाले समय में विषय आधारित चैनल होंगे। स्कोप बढेगा लेकिन प्रतिस्पर्धा भी बढेगी, इसके लिए उन्हें तैयार होना चाहिए। आज टेलीविज़न न्यूज़ में भाषा और खबरों की समझ होने के साथ सृजनात्मकता होना भी आवश्यक है। एक टेलीविज़न न्यूज़ चैनल में लगभग 20 विभाग होते है जिनके लिए मानव संसाधन चाहिए। मीडिया में आने वाला समय विशेषज्ञता का होगा। विद्यार्थियों को प्रयास करना चाहिए कि इंटर्नशिप के दौरान ही वह अपनी नौकरी पक्की कर ले। टीवी न्यूज़ के भविष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने  कहा कि क्षेत्रीय स्तर पर शुरू हुए न्यूज़ चैनल के कारण पत्रकारों के लिए काफी अवसर उपलब्ध है। पत्रकारिता विभाग की अध्‍यक्ष डॉ राखी तिवारी ने सत्र का संचालन किया।

मनुष्‍य के मस्तिष्‍क का विस्‍तार है सिनेमा – श्री सेन

समारोह के तीसरे सत्र में फिल्‍म निदेशक श्री सुदीप्‍तो सेन ने फिल्‍म निर्माण में केरियर विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि फिल्‍म मनुष्‍य के मस्तिष्‍क और भावनाओं का विस्‍तार है, जो चीजें हम रोज महसूस करते हैं उसे सिनेमा आगे बढ़ाता है। उन्‍होंने कहा कि फिल्‍म निर्माण में केरियर के लिए हमें इस तरह से तैयार होना होता है कि फिल्‍म मैकिंग उद्योग हमें चुने। मशीन को चलाकर फिल्‍म का निर्माण नहीं किया जा सकता है। 122 वर्ष लम्‍बे इतिहास में सिनेमा पूरी तरह बदल गया है। दुनिया की नजरों में भारत बहुत बड़ा बाजार है। यह बात उन्‍होंने जब महसूस की, जब देश से अचानक लगातार कई सुंदरियां विश्‍व पटल पर उभर कर आईं और उन्‍हें मिस यूनिवर्स, मिस वर्ल्‍ड जैसे खिताब मिले। बाद में पता लगा कि एक सौंदर्य प्रसाधन की कंपनी का कारोबार 90 से लेकर 1900 करोड़ हो गया है। हॉलीवुड सिनेमा हमारे यहां की गरीबी-भुखमरी को दिखाकर करोड़ों रुपये कमा लेता है। इस सत्र का संचालन विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के अध्‍यक्ष डॉ पवित्र श्रीवास्‍तव ने किया।

‘विश्वविद्यालय एक परिचय’ पर आयोजित चतुर्थ सत्र में श्री संजय द्विवेदी ने विश्वविद्यालय का इतिहास और विकास, डॉ. पवित्र श्रीवास्‍तव ने प्रवेश अनुशासन और रैगिंग और डॉ. राखी तिवारी ने पारस्‍परिक सम्‍बन्‍ध, डॉ. राजेश पाठक ने परीक्षा विषय पर विद्यार्थियों को सम्‍बोधित किया।