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समाजमूलक होना चाहिये शोध: श्री आहूजा

एमसीयू के संचार शोध विभाग में तीन दिवसीय रिसर्च सिम्पोजियम 2017 प्रारंभ

भोपाल, 25 सितम्बर, 2017: श्रेष्ठ शोध वही होता है जिससे समाज को कुछ मिलता है। शोध ऐसा होना चाहिये जिससे निष्कर्षो के आधार पर सरकार योजना बनाने के लिये तत्पर हो जाये। शोध समाजमूलक होना चाहिये। यह विचार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा ने विश्वविद्यालय के संचार शोध विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय रिसर्च सिम्पोजियम-2017 के शुभारंभ सत्र में व्यक्त किये।

      शुभारंभ सत्र में विज्ञापन एवं जनसम्पर्क विभाग के विभागाध्यक्ष एवं डीन (अकादमिक) डॉ. पवित्र श्रीवास्तव ने कहा कि आज रिसर्च के बिना कोई काम नहीं हो रहा है। फिल्म और विज्ञापन निर्माण के पहले व्यापक रिसर्च किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री संजय द्विवेदी ने जनसंघ के नेतृत्वकर्ता पं. दीनदयाल उपाध्याय को उनकी जयंती के शुभ अवसर पर श्रद्धासुमन अर्पित कर कहा कि उनका एकात्म मानववाद का विचार आज भी जिन्दा है।

      सिम्पोजियम के प्रथम सत्र में जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्थान, भोपाल के संयुक्त निदेशक श्री नीतिराज सिंह ने जनजातीय शोध संस्कृति पर विद्यार्थियों को उदबोधन दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्र में शोध करने के पूर्व शोधार्थी को उनकी संस्कृति को समझना चाहिये। दूसरे सत्र में पूर्व निदेशक, सामाजिक विकास परिषद, डॉ. बी. एस. नागी ने विद्यार्थियों को शोध प्रस्ताव की बारीकियां बताई। कार्यक्रम का संचालन संचार शोध विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मोनिका वर्मा ने किया और सिम्पोजियम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती, दादा माखनलाल चतुर्वेदी एवं पं. दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।