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मतदान के प्रति लोगों को जागरूक करना युवाओं का कर्तव्य

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में 'भारतीय लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली एवं युवाओं की भूमिका' विषय पर परिचर्चा आयोजित

भोपाल, 29 अक्टूबर, 2018: युवाओं की भूमिका सिर्फ प्रश्न पूछने एवं व्यवस्था में कमियां निकालने तक सीमित नहीं है। युवाओं को उत्तर एवं समाधान सुझाने की भूमिका में आना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत एवं सफल बनाने के लिए युवाओं को स्वयं तो मतदान करना ही चाहिए, अपने आस-पास के लोगों को भी मतदान के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। यह युवाओं का कर्तव्य है कि वह लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करें और उन्हें मतदान केंद्र तक लेकर जाएं। यह विचार थिंक टैंक प्रज्ञा प्रवाह के प्रांतीय संयोजक श्री दीपक शर्मा ने व्यक्त किए। वह 'भारतीय लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली एवं युवाओं की भूमिका' विषय पर युवाओं को संबोधित कर रहे थे। इस युवा संवाद एवं परिचर्चा का आयोजन यंग थिंकर्स फोरम (वायटीएफ) और माखलनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के सभागार में किया गया। 

            इस अवसर पर श्री शर्मा ने कहा कि सकारात्मक परिवर्तन लाने में युवाओं को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि 70 वर्ष के लोकतंत्र में हमें जो प्राप्त हुआ है, वह सुखद है। उन्होंने बताया कि भारत में चुनाव आयोग की स्थापना वर्ष 1951 में हुई और उसने पहला चुनाव 1952 में सम्पन्न कराया। तब से लेकर आज तक चुनाव आयोग आम चुनाव और राज्यों के चुनाव से लेकर पंचायत स्तर तक के चुनाव सम्पन्न करा चुका है। आयोग ने यह सभी चुनाव पूरी निष्पक्षता के साथ कराए हैं। यह चुनाव आयोग की उपलब्धि है। चुनाव आयोग ने समय-समय पर निर्वाचन प्रक्रिया में सुधार भी किए हैं। उन्होंने बताया कि ईवीएम सुरक्षित मशीन है। किसी भी प्रकार इसमें छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। यह हमारे लिए गौरव की बात है कि दुनिया के कई देश अपने यहाँ चुनाव कराने के लिए हमसे ईवीएम मशीन लेते हैं।

युवाओं के सक्रिय सहभागिता से सफल होता है लोकतंत्र:

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि हमें सक्रिय सहभागिता करनी चाहिए। लोकतंत्र केवल 24 घंटे का उत्सव नहीं है, यह 365 और 24 घंटे का पर्व है। हमें अधिक से अधिक मतदान करना चाहिए और 100 प्रतिशत मतदान की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र युवाओं की सक्रिय सहभागिता से मजबूत और सफल होता है। प्रो. द्विवेदी ने बताया कि पिछले 70 वर्षों में हमारे देश में निर्वाचन प्रक्रिया लगातार मजबूत और निष्पक्ष हुई है। लोकतंत्र के संबंध में कहा जाता है कि कोई भी लोकतंत्र 100 वर्ष में सार्थक होता है, लेकिन हमें तो अभी 70 वर्ष ही हुए हैं। चुनाव में मीडिया की भूमिका पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि मीडिया जनता की आकांक्षाओं और नीति-नियंताओं के बीच सेतु की भूमिका का निर्वाहन करती है। मीडिया कभी निरपेक्ष नहीं रहती। मीडिया का पक्ष सत्य का पक्ष होता है। उन्होंने बताया कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी मीडिया की प्रभावी भूमिका रही है। युवा संवाद एवं परिचर्चा का संचालन वायटीएफ के कार्यकर्ता शुभम चौहान और सुनील साहू ने किया। आभार प्रदर्शन अभिलाष ठाकुर ने किया।

युवाओं के विचार:

- परिचर्चा में प्रतियोगिता के माध्यम से चयनित तीन युवाओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए। माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के विद्यार्थी आशुतोष भार्गव ने कहा कि युवाओं को किसी दबाव में मतदान नहीं करना चाहिए। हमें नोटा का उपयोग करने की अपेक्षा उपलब्ध अच्छे प्रत्याशी को चुनना चाहिए। श्री भार्गव ने कहा कि लोगों को मतदान केंद्र तक ले जाना युवाओं का कर्तव्य है।

- बीएसएसएस कॉलेज के छात्र संबल झा ने कहा कि मतदान कराना सिर्फ निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी नहीं है। निर्वाचन को और अधिक बेहतर बनाने के लिए युवाओं को भी पत्र या ईमेल के माध्यम से अपने विचार आयोग तक पहुँचाने चाहिए।

- नूतन कॉलेज की छात्रा प्रिया मैथिल ने कहा कि लोकतंत्र खेल ही बहुमत का है और इस समय देश में युवाओं का बहुमत है। देश में 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं की संख्या 65 प्रतिशत है।