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पीआरओ को पीए बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए – मालवीय

आसान लिखना बहुत कठिन काम है – जोशी

डेटा ऑक्सीजन है, जो पूरे डिजिटल सिस्टम को चलाता है – माहेश्वरी

अपने आत्मबल को जगाइए – श्री उपासने

विद्यार्थी, विश्वविद्यालय का ब्रांड एम्बेसेडर होता है – प्रो. द्विवेदी

थियेटर एवं फिल्मों में बहुत गुंजाइश है – श्री चटर्जी

भोपाल, 27 नवम्बर 2018: डेटा ऑक्सीजन है, जो पूरे डिजिटल सिस्टम को चलाता है। ये कहना है वरिष्ठ पत्रकार एवं भास्कर डॉट कॉम के डिप्टी एडीटर श्री कमलेश माहेश्वरी का। वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। दूसरे दिन के प्रथम सत्र में “डिजिटल कम्युनिकेशन, मार्केटिंग एडवरटाईजिंग पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस फील्ड में आना है तो आपको ट्रेंड्स के साथ चलना होगा। डाटा एवं स्पीड की बात करते हुए उन्होंने कहा कि पहले हम गिनकर डाटा खर्च करते थे, लेकिन आज वैसी स्तिथी नहीं है। स्पीड में स्कोप कि बात करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल विकास का सबसे बड़ा कारण मोबाइल है क्योंकि पूरे समय हम इसे अपने पास रखते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से रीच, इन्गेज, एक्ट एवं कनेन्ट चार बातों का हमेशा याद रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यम हर कदम पर आपको चौंकाता है, जहां आपने लोगों का चौंकाया तो आप सफल हैं और यदि आपको सफल होना है तो लोगों को चौंकाना पड़ेगा। आर्टिफिशयल इंटेलीजेन्स की बात करते हुए उऩ्होंने कहा कि आने वाले समय में ये हमारे लिये सबसे बड़ी चुनौती होगी। श्री माहेश्वरी ने इसे मानवता के लिए खतरा बताते हुए कहा कि ये हमारे सोचने की शक्ति को खत्म कर देगा। अभी हमें इसे टक्कर देना है।

म.प्र. जनसंपर्क विभाग के रिटायर्ड एडीश्नर डायरेक्टर श्री दिनेश मालवीय ने सफल जनसंपर्क प्रोफेशनल की कहानियों को सुनाया, साथ ही उन्होंने सफल पीआर प्रोफेशनल बनने के गुण भी विद्यार्थियों को बताए । उन्होंने कहा कि पीआरओ दो तरह के होते हैं एक सरकार का होता है और दूसरा कारपोरेट को होता है। हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में पकड़ होने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जनसंपर्क कर्मी को भाषा पर भी अतिरिक्त मेहनत करनी चाहिए। इसके लिए उसे पुस्तक एवं पुराने साहित्य को पढ़ना चाहिए, क्योंकि पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं है। श्री मालवीय ने विद्यार्थियों को आगाह करते हुए कहा कि इस फील्ड में आप बहुत बड़े-बड़े लोगों के आस-पास रहते हैं उनके साथ उठना-बैठना होता है, इसलिए एक पीआरओ को पीए बनने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने अपनी कुछ स्टोरी, जिसमें “नारु रोग”, “विकास दर”, “लाल मिर्च”, “पान मसाला”, “कृषि विकास दर” को भी विद्यार्थियों को बताया। सत्र की अध्यक्षता मीडिया शोध विभाग की अध्यक्ष डॉ. मोनिका वर्मा ने की। 

अगले सत्र में माय एफएम इंदौर के सीनियर कॉपी राइटर श्री विश्वनाथ जोशी ने “कैम्पेन प्लानिंग फॉर एडवरटाइजिंग” विषय पर बोलते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति या वस्तु की छबि बनाना ही ब्रांड है। उन्होंने कहा कि इस फील्ड में आपको अपने टारगेट ऑडियंश का हमेशा ध्यान रखना होता है । विद्यार्थियों को उन्होंने कहा कि यदि वे इस फील्ड में आने की सोच रहे हैं तो उनमें ना सुनने की ताकत होनी चाहिए, क्योंकि कई बार आपकी कॉपी को ना कहा जाएगा। कभी आपके बॉस को तो कभी क्लाइंड को आपका लिखा पसंद नहीं आएगा । श्री जोशी ने इसके साथ ही कहा कि यदि आपको आसान लिखना आता है तो आप विज्ञापन जैसी फील्ड में आ सकते हो, क्योंकि आसान लिखना बहुत कठिन काम है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में आपको बाजार एवं जमाने के हिसाब से चीजें लिखना होता है। सत्र की अध्यक्षता कम्प्यूटर एप्लीकेशन विभाग के प्रोफेसर श्री सी.पी. अग्रवाल ने की।

तीसरे सत्र में म.प्र. नाट्य विद्यालय के डायरेक्टर श्री आलोक चटर्जी ने फिल्म, रंगमंच एवं विज्ञापन पर अपने विचार व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि जितने प्रयोग आज सिनेमा में नहीं हो रहे हैं, उतने रंगमंच में हो रहे हैं। श्री चटर्जी ने कहा कि तकनीक एवं एजुकेशन जितना बढ़ रहा है उतना थियेटर भी बढ़ रहा है। टीवी पर होने वाले कार्यक्रमों पर उन्होंने कहा कि आजकल टीवी पर बहुत कल्चरल करप्शन हो रहा है। अपने संबोधन में उन्होंने देश-विदेश के सिनेमा की बात की एवं विद्यार्थियों से कहा कि थियेटर एवं फिल्मों में बहुत गुंजाइश है। अपनी जड़ो से जुड़े रहने की बात करते हुए उन्होंने गुरुओं का सम्मान करने की भी बात विद्यार्थियों से कही। युवा का मतलब ऊर्जा एवं नवीनता बताते हुए उन्होंने कहा कि जिंदगी मजाक नहीं है, इसलिए जिंदगी को जिंदगी की तरह जिएं।

अंतिम सत्र में विश्वविद्यालय के कुलपति श्री जगदीश उपासने ने कहा कि विद्यार्थियों को अपने आत्मबल को जगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की धरती बहुत ही रचनात्मक है और आप भाग्यशाली है कि आपका जन्म यहां हुआ। आपको अपने अंदर की रचनात्मक के साथ ही आत्मबल को भी जगाने की कोशिश करना चाहिए। श्री उपासने ने कहा कि आप भीड़ का हिस्सा मत बनिए बल्कि कुछ हटकर अलग करिये तभी आपको लोग जानेंगे। उन्होंने कहा कि भीड़ में चलने वालों की पहचान नहीं होती है। विवि. के कुलसचिव प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि शिक्षकों की भूमिका पिता जैसी होती है। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्रों के विभिन्न उदाहरण देते हुए कहा कि विद्यार्थी, विश्वविद्यालय का ब्रांड एम्बेसेडर होता है वह बाहर विश्वविद्यालय की पहचान बनाता है। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि आपको नित्य नया करना है, क्योंकि सोसायटी बड़ी डिमांडिंग है इसलिए आपको मेहनत करना चाहिए। अंत में विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग के अध्यक्ष प्रो. ( डॉ.) पवित्र श्रीवास्तव ने आभार प्रदर्शन किया।