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आउट ऑफ़ द बॉक्स सोचने के पहले बॉक्स का सही साइज़ जानना ज़रूरी : श्री जगदीश उपासने

“दुनिया तक सही जानकारी को पहुंचाने के लिये जर्नलिस्ट और टेक्नोलोजिस्ट को एक साथ आना होगा” : डॉ. अनुभूति यादव

पत्रकार बनाते हैं समाज की सोच : श्री अजिंक्य कुलकर्णी

भोपाल 01 दिसम्बर, 2018: गूगल ने एक पहल की है, जिसके द्वारा पत्रकारों को ऑनलाइन कंटेंट वेरिफिकेशन के लिय जागरूक किया जा रहा है। यदि लोग ऑनलाइन कंटेंट की प्रमाणिकता के प्रति जागरूक हो गए तो ऑनलाइन धोखाधड़ी और नकारात्मक सूचनाओं के प्रचार-प्रसार पर नियंत्रण लाया जा सकता है। यह बात भारतीय जनसंचार संस्थान,नईदिल्ली के नवीन मीडिया विभाग की अध्यक्ष डॉ. अनुभूति यादव ने कही। वह माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के नवीन मीडिया प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से “सेंसेटाईज़ेशन ऑफ़ इनफार्मेशन एंड साइबर सिक्योरिटी” विषय पर आयोजित सेमिनार में विद्यार्थियों को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति श्री जगदीश उपासने ने कहा कि हर एप्प के इंस्टालेशन के साथ आपकी अनेक जानकारी लीक होती हैं। इस प्रतिस्पर्धी युग में आउट ऑफ़ द बोक्स सोचने के पहले बॉक्स का सही आकार जानना ज़रूरी है।

डॉ. अनुभूति ने “चेंज इन इनफार्मेशन लैंडस्केप इन इंडिया” विषय पर विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने ऑनलाइन वेरिफिकेशन एंड फैक्ट चेकिंग, फेक न्यूज़ इंडिया स्टोरी, टाइप्स ऑफ़ मिस-इनफार्मेशन / डिस-इनफार्मेशन और ट्रुथ इन १० सेकंड्स के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि हम 10 सेकंड में बहुत ही सरल तरीकों से सच्चाई की तह तक जा सकते है, जैसे की-वर्ड सर्च, सोर्स का पता करना, रिवर्स इमेज सर्च, क्रोप्पिंग इमेज, टाइम फ़िल्टर आदि और इनके लिए कई टूल्स भी आसानी से उपलब्ध है जो गूगल तक ही सीमित नहीं हैं। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वायरल हुए कई फेक न्यूज़ को आधार बताते हुए कहा कि कई हस्तिया और नेता फेक न्यूज़ के शिकार हुए हैं। डॉ. यादव ने बताया कि वायरल या फेक न्यूज़ दो प्रकार की होती हैं। मिस-इनफार्मेशन यानी जब हम किसी न्यूज़ को बिना समझे फॉरवर्ड कर देते हैं। डिस-इंफार्मेशन यानी जब कोई जानबूझ कर किसी न्यूज़ को फॉरवर्ड करता  है। समाज को यह ज्यादा नुक्सान पहुंचती है। इसका तात्पर्य यह है कि वायरेलिटी में जब इंटेंट या उद्देश्य आ जाता है तो वह न सिर्फ समाज के लिये बल्कि पूरे  विश्व के लिये एक खतरा बन जाता है। उन्होंने बताया कि इससे मुख्यधारा का मीडिया भी अछूता नहीं है। बड़े मीडिया संस्थान भी कई बार सही न्यूज़ को पहचानने में देर कर देते हैं।

संगोष्ठी के समापन सत्र में नवीन मीडिया के जानकार श्री अजिंक्य कुलकर्णी ने कहा कि कंटेंट के द्वारा सोच बदलने का प्रयास चारों ओर दिखाई दे रहा है। इसलिये आज राष्ट्रहित सम्बंधित कंटेंट बनाने की और उसे सही प्लेटफार्म पर प्रचारित-प्रसारित करने की आवश्यकता है। सेन्सेटाइज़ेशन विषय पर जोर डाल कर उन्होंने कहा कि सेन्सेटाइज़ेशन करने वाले और सेन्सेटाइज़ होने वाले की मानसिकता में गहरा फर्क होता है। “इनफार्मेशन बोम्बार्डमेंट” के ज़माने में इनफार्मेशन व्यक्ति तक हर ओर से आती है। उन्होंने कहा कि यह व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर तो घट ही रहा है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी यह खतरा मंडरा रहा है। इसलिए हम सब को राष्ट्रीय सुरक्षा का सदैव ध्यान रखना चाहिए और उसे बनाये रखने के लिए अपनी तकनीकी प्रतिभा और गुणों का प्रयोग करते रहना चाहिए। इस अवसर पर नवीन मीडिया विभाग की अध्यक्ष डॉ. पी. शशिकला ने अतिथियों का स्वागत किया और परिचय डॉ. पवन सिंह मलिक ने कराया। डॉ. उर्वशी परमान ने धन्यवाद ज्ञापित किया।