MC University

  About University
icon About University
icon From VC's Desk
  Governing Bodies
icon Management Council
   
 

'मैं नहीं बिकने वालों में, मैं हूँ कड़क खुद्दारों में'

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के आयोजन 'प्रतिभा-2018' में काव्यपाठ, एकल गायन एवं परिधानिका में एक से बढ़कर एक प्रस्तुति

भोपाल, 22 मार्च, 2018: माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के वार्षिक सांस्कृतिक एवं खेलकूद आयोजन 'प्रतिभा-2018' के अंतर्गत गुरुवार को स्वरचित काव्यपाठ प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। विद्यार्थियों ने अपनी कविताओं से पत्रकारिता, समाज और देश की स्थिति को प्रस्तुत किया और महत्वपूर्ण संदेश भी दिए। प्रशांत मिश्रा ने अपनी कविता में एक ईमानदार और स्वाभिमानी पत्रकार को प्रस्तुत किया- 'जाओ जाकर खरीद लो जो बिकते हों बाजारों में। मैं नहीं बिकने वाला, मैं हूँ कड़क खुद्दारों में।' युवा कवि पंकज कसरादे ने पत्रकार की जिम्मेदारी को कुछ इस तरह बयान किया- 'हुकूमत है बड़ी जालिम, कलम से आग बरसा तू।' युवा कवियों के प्रस्तुति, कविता की उनकी समझ और उनके भाव की सराहना निर्णायक मंडल ने भी की। निर्णायक मंडल में शामिल वरिष्ठ कवि महेन्द्र गगन और डॉ. साधना बलबटे ने कहा कि जिस समय में पत्रकारिता साहित्य से दूर हो रही है, उसी समय में माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय पत्रकारिता को पुन: साहित्य के पास लाने का प्रयास कर रहा है।

               काव्यपाठ में प्रतिभागी नचिकेता पुरोहित ने मंजिल की ओर लगातार बढ़ते रहने का संदेश दिया। उनकी कविता की पंक्तियां थीं- 'ले रहे परीक्षा धैर्य की, न चेष्टा है ऐश्वर्य की। नदी-नीर सम बह रहे, न भटकेंगे कभी। धीमे-धीमे चल रहे हैं, मंजिल पा ही लेंगे कभी।' दूसरे प्रतिभागी तेजस्वी ठाकुर ने प्रेम पर कविता पढ़ते हुए कहा- 'हम दोनों में बस इतना फासला है। ना तुझमें हौसला है, ना मुझमें हौसला है।' वहीं, विभव देव शुक्ला ने अपनी कविता में उन विषयों की ओर संकेत किया, जिन पर कलम कम ही चलती है। उनकी कविता की पंक्तियां इस प्रकार थीं- 'लेखन नहीं होता, बाऊजी के उन मजबूत कंधों पर।' प्रकृति दोषी ने छोटी बच्चियों के साथ होने वाली दुष्कर्म की घटना पर मार्मिक कविता प्रस्तुत की- 'शर्म नहीं आई जिसे मेरी बच्ची की चीखों पर। मेरी परी के आंसुओं पर जिसने दया नहीं की। मैं ही बेवकूफ थी, जो लोगों को इंसान समझती थी।' मुहम्मद मामून ने पिता के जीवन पर कविता प्रस्तुत की। उन्होंने पढ़ा- 'वो आज भी टूटे हुए चश्मे से अखबार पढऩे का लुत्फ उठाते हैं। क्योंकि मेरे पापा आज भी पैसे बचाते हैं।' वहीं, देशभक्ति के भाव से ओतप्रोत कविता पढ़ते हुए गजाला अंजुम अहमद ने कहा- 'अगर बन जांऊ मैं शायर तो यही पैगाम लिखूंगी। अर्श से फर्श तक, फर्श से अर्श तक हिंदुस्थान लिखूंगी।' इसके अलावा एस. योगेश्वर शांतनु, श्वेता रानी, शिवाली, निसर्ग, सुमैय्या सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपनी कविता से सभागार में उपस्थित निर्णायकों एवं अन्य लोगों का ध्यान आकर्षित किया।

आकर्षण का केंद्र बना परिधानिका :

सांस्कृतिक कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आरती सारंग ने बताया कि विश्वविद्यालय के प्रतिभा आयोजन में पहली बार शामिल हुई 'परिधानिका' प्रतियोगिता सबके आकर्षण का केंद्र बन गई। परिधानिका के माध्यम से प्रतिभागियों ने भारत के विभिन्न राज्यों की वेश-भूषा और संस्कृति को प्रदर्शित किया। प्रतिभागियों ने आयोजन स्थल पर 'लघु भारत' को साकार कर दिया। कोई जम्मू-कश्मीर की वेश-भूषा में आया, तो कोई बंगाली साड़ी और कुर्ता-पाजामा पहनकर आया। वहीं, किसी ने राजस्थानी रंगों को साकार किया, तो किसी ने केरल की सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया। पूर्वोत्तर राज्यों की भी झलक दिखाई दी। इसके साथ ही एकल गायन प्रतियोगिता में भी प्रतिभागियों ने अपनी प्रतिभा प्रदर्शन किया। वहीं, रंगोली प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रंगों के संयोजन से 'भारतीय नववर्ष' को प्रकट किया।

प्रश्नोत्तरी में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग ने मारी बाजी :

प्रतिभा में प्रश्नोत्तरी (क्विज) प्रतियोगिता दो स्तरों पर हुई- स्नातक एवं स्नातकोत्तर। स्नातकोत्तर वर्ग की प्रश्नोत्तरी में पत्रकारिता विभाग ने प्रथम, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग ने द्वितीय एवं जनसंचार विभाग के विद्यार्थियों ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। जबकि स्नातक वर्ग की प्रतियोगिता में जनसंचार विभाग ने प्रथम, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग ने द्वितीय और नवीन मीडिया विभाग ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

आज की प्रतियोगिताएं : प्रतिभा-2018 में शुक्रवार को एकल वाद्य, एकल अभिनय, समूह गायन और माईम की प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। यह प्रतियोगिताएं प्रात: 9 से सायं 5 बजे तक आयोजित की जाएंगी।