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'कश्मीर समस्या और समाधान' विषय पर व्याख्यान आज

जम्मू-कश्मीर और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ एवं हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री का होगा व्याख्यान, जनसंपर्क एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा भी होंगे शामिल

भोपाल, 03 अप्रैल, 2018: माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की ओर से 4 अप्रैल को अपराह्न 4 बजे से समन्वय भवन में 'कश्मीर समस्या और समाधान' विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया है। यह व्याख्यान स्वतंत्रता सेनानी एवं कवि माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती प्रसंग पर आयोजित है। विश्वविद्यालय प्रतिवर्ष 4 अप्रैल को माखनलाल चतुर्वेदी स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन करता है। 'कश्मीर समस्या और समाधान' विषय पर मुख्य वक्तव्य हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री का रहेगा। कार्यक्रम में जनसंपर्क एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा मुख्य अतिथि होंगे और अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति श्री जगदीश उपासने करेंगे। 

            मुख्य वक्ता प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ हैं। जम्मू-कश्मीर के संबंध में उनका गहरा अध्ययन है। जम्मू-कश्मीर पर उनकी कई पुस्तक प्रकाशित हो चुकी हैं। 'जम्मू-कश्मीर की अनकही कहानियां' उनकी चर्चित पुस्तक है। प्रो. अग्निहोत्री पत्रकारिता से भी जुड़े रहे हैं। बहुभाषी समाचार एजेंसी हिंदुस्थान से भी उनका संबंध रहा है। उन्होंने भारत तिब्बत सहयोग मंच के राष्ट्रीय संयोजक के नाते तिब्बत समस्या पर गंभीर अध्ययन किया है। हिंदी और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर प्रो. अग्निहोत्री ने पीएचडी के बाद वकालत भी की। तमिल, संस्कृत में डिप्लोमा के साथ उन्हें पंजाब विश्वविद्यालय से आदि ग्रंथ आचार्य की उपाधि प्राप्त है।

माखनलाल चतुर्वेदी की आंदोलनकारी पत्रकारिता पर केंद्रित पुस्तक का होगा विमोचन :

इस अवसर पर रतौना आंदोलन और कर्मवीर की पत्रकारिता पर केंद्रित शोधपूर्ण पुस्तक 'रतौना आंदोलन : हिंदू-मुस्लिम एकता का सेतुबंध' पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा। पुस्तक का प्रकाशन विश्वविद्यालय ने किया है। उल्लेखनीय है कि अपने समाचार-पत्र 'कर्मवीर' के माध्यम से माखनलाल चतुर्वेदी ने पत्रकारिता को एक दिशा दी थी। पत्रकारिता को उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का हथियार बनाया। 1920 में सागर के निकट रतौना में अंग्रेजों ने वृहद कसाईखाना खोलने की योजना बनाई थी। इस कत्लखाने में सिर्फ गायें नहीं काटी जानी थी, बल्कि हिंदू-मुस्लिम समाज को बाँटने का भी षड्यंत्र अंग्रेजों ने रचा था। किंतु, माखनलाल चतुर्वेदी ने कर्मवीर में रतौना के विरुद्ध संपादकीय लिख कर और अन्य सामग्री प्रकाशित कर अंग्रेजों के विरुद्ध देश व्यापी आंदोलन खड़ा कर दिया था। इस आंदोलन के कारण मध्यभारत में पहली बार अंग्रेज परास्त हुए थे। उन्हें कत्लखाना खोलने का अपना निर्णय वापस लेना पड़ा था। इसे ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध पत्रकारिता के सफल अभियान के तौर पर भी देखा जाता है।