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पेड और फेक न्‍यूज़ से राजनीतिक दल भी चिंतित - श्री रावत

माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के सत्रारंभ समारोह में विद्यार्थियों से रूबरू हुये मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त 

भोपाल, 28 अगस्‍त, 2018: देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त श्री ओ.पी.रावत ने कहा कि आज मीडिया ही चुनाव पर छाया हुआ है। विश्‍वभर के प्रजातंत्र देशों में जनमत को किस तरह से 'डाटा हार्वेस्टिंग' करके प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, इसके उदाहरण हमारे सामने हैं। आने वाले समय में हमारे देश में  भी चुनाव होना है। चुनाव में पेड न्‍यूज़ और फेक न्‍यूज़ का मुद्दा आम है। राजनीतिक दल भी इसे लेकर चिंतित हैं। इसके निपटने के लिए चुनाव आयोग ने कई कदम उठा रहा है।

            श्री रावत मंगलवार को माखनलाल चतुर्वेदी राष्‍ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्‍वविद्यालय के सत्रारंभ-2018 में 'निर्वाचन और मीडिया' विषय पर विद्यार्थियों को सम्‍बोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि फेक न्‍यूज़ का उदाहरण हमारे पौराणिक ग्रंथों में भी मिलता है, जब महाभारत युद्ध में घोषणा की गई कि 'अश्‍वत्‍थामा मारा गया' और इसके बाद के शब्‍द शंख ध्‍वनि में नहीं सुनाई दिए। लेकिन आज फेक न्‍यूज़ का ट्रेंड बहुतायत में है।  क्‍या सही है और क्‍या गलत है यह पता ही नहीं लग पाता।

            उन्‍होंने कहा कि पेड न्‍यूज़ को लेकर के मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी बनाई गई है, जिसमें पेड न्‍यूज़ को पता करने की प्रक्रिया तय की गई है। चुनाव आयोग से सोशल मीडिया चला रही कंपनियों ने कहा कि वे चुनाव प्रभावित नहीं होने देंगे और चुनाव के 48 घंटे पहले चुनाव से संबंधित कोई सामग्री सोशल मीडिया पर प्रकाशित नहीं करेंगी। श्री रावत ने कहा कि आने वाले 4 राज्‍यों के चुनाव के दौरान इसका परीक्षण हो जाएगा और इसके बाद होने वाले लोकसभा चुनाव में भी यह सुनिश्चित हो जाएगा कि सोशल मीडिया से चुनाव प्रभावित न हो।

            उन्‍होंने कहा के संविधान के अनुच्‍छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को निष्‍पक्ष चुनाव निदेशन, अधीक्षण और नियंत्रण के लिए शक्ति दी गई है। उच्‍चतम न्‍यायालय ने इसी अनुच्‍छेद के तहत चुनाव आयोग को शक्ति प्रदान की है कि जब भी कोई परिस्थिति ऐसी आती है जिससे निपटने के लिए स्‍पष्‍ट कानून न हो तो चुनाव आयोग कानून भी बना सकता है। इस 'प्‍लेनरी पॉवर' के कारण ही चुनाव आयोग ने एक राज्‍य में चुनाव के पहले 90 करोड़ रुपये बांटे जाने की घटना के बाद चुनाव न कराने का फैसला लिया था।

            विद्यार्थियों के प्रश्‍नों का जवाब देते हुये श्री रावत ने कहा कि आज हमारे देश में हर काम सूचना प्रौद्योगिकी को लेकर हो रहा है। तब हम वापस मत पत्र से कैसे चुनाव करवा सकते हैं। क्‍या हम वापस बूथ केप्‍चरिंग वाले दौर में जाना चाहते हैं? उन्‍होंने कहा की तकनीक के उपयोग से चुनाव सरल और सुलभ हो गए हैं। भारत में उपयोग की जा रही ईवीएम मशीन विश्‍वभर में अनोखी है और वीवीपेट से जुड़ने के बाद वहीं मतों की संख्‍या को दोबारा जांच सकते हैं। ईवीएम में टेम्‍परिंग नहीं हो सकती, उसमें ऑसीलेटरी सर्किट नहीं हैं। इस कारण मशीन को किसी दूसरी मशीन से नहीं जोड़ा जा सकता। टेम्‍परिंग किये जाने पर वह लॉक हो जाएगी।

            उन्‍होंने कहा कि चुनावी खर्च पर नियंत्रण के लिए व्‍यापक विचार-विमर्श किए जाने की जरूरत है। चुनाव आयोग, चुनाव में धन का दुरूपयोग किये जाने पर नियंत्रण पर लगातार प्रयास कर रहा है। नोटा को लेकर पूछे गये प्रश्‍न पर उन्‍होंने कहा कि उच्‍चतम न्‍यायालय के आदेश के तहत् नोटा लागू किया गया था। 'एक देश एक चुनाव' के सवाल पर उन्‍होंने कहा कि देश में एक साथ चुनाव कराने के लिये लगभग 32 लाख ईवीएम मशीन चाहिए। अभी आयोग के पास 15-16 लाख मशीनें हैं। इसके अलावा संवैधानिक प्रावधानों में भी संशोधन आवश्‍यक है। एक साथ चुनाव कराने के लिए केन्‍द्रीय पुलिस बल भी बड़ी संख्‍या में चाहिए।

            अपराधियों के चुनाव लड़ने को लेकर उन्‍होंने कहा कि इस बारे में आयोग ने एक जनहित याचिका पर जवाब दिया है कि सभी प्रकार के दोषी, जिनको सजा हो चुकी है उनको आजीवन चुनाव लड़ने रोका जाए और जिनके विरुद्ध आरोप-पत्र जारी हो चुका है उन पर भी चुनाव लड़ने से प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि सोशल मीडिया से प्रसारित होने वाली चुनाव संबंधित सामग्रियों को लेकर विशेषज्ञ समूह बनाये जाएं, जिसकी रिपोर्ट आने वाली है।

            कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए कुलपति श्री जगदीश उपासने ने कहा कि हमारा चुनाव आयोग दुनिया के उच्‍चतम चुनाव आयोगों में से एक है। कार्यक्रम का संचालन कुलाधिसचिव श्री लाजपत आहूजा ने किया। कुलपति श्री उपासने ने श्री रावत शॉल, श्रीफल एवं स्‍मृति चिह्न भेंट कर सम्‍मानित किया।

बॉक्‍स- सभी पार्टियों द्वारा चुनाव आयोग पर आरोप लगाये जाने के सवाल पर श्री रावत ने कहा कि चुनाव के दौरान आयोग की भी पंचिंग होती है। उन्‍होंने कहा कि जब कुश्‍ती होती है दोनों पक्षों के निशाने पर रेफरी ही होता है। जबकि अलग मुलाकातों में राजनेता चुनाव आयोग की सराहना ही करते हैं।